Saturday, July 2, 2022

तुलसीदास पर महत्वपूर्ण जानकारी

तुलसीदास के माता पिता का नाम

उनके पिता आत्माराम दुबे बाह्मण थे और उनकी माता का नाम हुलसी था। माता के नाम का संकेत तुलसी साहित्य के अन्तर्गत भी मिलता है। यथा :-

 

रामहिं प्रिय पावन तुलसी सी।

तुलसी दास हित हिय हुलसी सी॥ 


कहते हैं, जन्म के समय तुलसीदास ने राम नाम का उच्चारण किया था। इसलिए इन्हें ‘रामबोला’ के नाम से भी जाना जाता है। रामबोला के जन्म के तीन दिन पश्चात् इनकी माता का देहान्त हो गया था।

तुलसीदास को दासी चुनिया इनके पिता के पास ले गई। किन्तु पिता ने अमंगल नक्षत्र में उत्पन्न होने के कारण उसे लेने से इन्कार कर दिया। लगभग पांच वर्ष उपरांत चुनिया भी सर्पदंश से परलोक सिधार गईं।


तुलसीदास के गुरु और शिक्षा

परिणामस्वरूप, बालक तुलसीदास का बचपन बड़े संकट में बीता। वे द्वार-द्वार भीख मांगने लगे। सौभाग्यवश बालक तुलसीदास को साधु नरहरिदास मिल गये जिन्होंने इनका पालन-पोषण किया और दीक्षा भी दी।

गुरु नरहरि दास अपने शिष्य तुलसीदास को काशी ले आए जहां उन्होंने सनातन नामक विद्वान से पुराण, इतिहास और काव्य-कला का अध्ययन किया। उनका अध्ययन काल पन्द्रह वर्ष बताया जाता है।

 


तुलसीदास का विवाह

विद्याध्ययन के पश्चात् तुलसीदास घर लौटे। उनका विवाह दीनबन्धु पाठक की कन्या रत्नावली से सम्पन्न हो गया। गोस्वामी तुलसीदास का पत्नी प्रेम प्रसिद्ध है।

कहते हैं कि पत्नी के अपने मायके चले जाने के कारण तुलसीदास प्रेम विह्वल होकर घोर वर्षा में भी उसके पीछे-पीछे ससुराल जा पहुँचे। रत्नावली बड़ी लज्जित हुई और उन्हें फटकारते हुए बोली :-



लाज न आवत आपको, दौरे आयहु साथ।

धिक्-धिक ऐसे प्रेम को, कहा कहाँ मैं नाथ ॥

अस्थि चर्म इह देह मम, ता में ऐसी प्रीति।

होती जो श्रीराम महं, होति न भव भीति॥



सन्यासी बनने का कारण

पत्नी के फटकार भरे शब्दों को सुनकर उन्हें बड़ा दुःख हुआ। उनके जीवन में परिवर्तन आ गया वे ‘श्री राम महं’ प्रीति का मंत्र लेकर संन्यासी बन कर निकल पड़े।



तुलसीदास की यात्राएं और सत्संग

उन्होंने उत्तर में मान सरोवर और दक्षिण में सेतुबन्ध रामेश्वरम् तक की यात्रा की थी। चित्रकूट इनका सर्वप्रिय स्थान था। काशी, प्रयाग और अयोध्या तो इनके स्थायी स्थान थे ही।

विद्वानों का ऐसा मानना है कि तुलसीदास ने पच्चीस वर्ष तक सतत् यात्रा की और अनेक भक्तों एवं महात्माओं के सत्संग का आनन्द-लाभ उठाया।

तुलसीदास की मुलाकात

भक्त सूरदास ने विशेष रूप से इनसे भेंट की थी। कवि केशव दास, अबुर्रहीम खानखाना और मीराबाई से इनकी भेंट होने की बात भी प्रचलित है।



तुलसीदास की रचनाएँ

हिन्दी के हस्तलिखित खोज विवरणों के अनुसार तुलसी कृत उनतालीस रचनाएं मानी जाती हैं। इनमें से –

  • राम लला
  • नहछू रामाज्ञा प्रश्न
  • जानकी मंगल
  • राम चरित मानस
  • पार्वती मंगल
  • गीतावली
  • कृष्ण गीतावली
  • विनय पत्रिका
  • बरवै रामायण
  • दोहावली

कवितावली और हनुमान वाहुक इनकी प्रामाणिक रचनाएं हैं।

तुलसीदास ने प्रबंध और मुक्तक दोनों प्रकार की उत्कृष्ट रचनाएं की। राम चरित मानस हिन्दी साहित्य का सर्वोत्कृष्ट महाकाव्य है

राम लला नहछू और दोनों मंगल खण्ड काव्य तथा गीतावली, कृष्ण गीतावली और विनय पत्रिका हिन्दी के सर्वोत्तम गीतिकाव्यों में से हैं

गोस्वामी तुलसीदास का दोनों साहित्यिक भाषाओं- अवधी और ब्रज पर एक साथ जितना अधिकार था, ऐसा हिन्दी साहित्य में न किसी को पहले मिला और न बाद में।

 

प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस

उन्होंने रामचरितमानस में आदर्श समाज व्यवस्था, राजा, प्रजा, ऊंच-नीच आदि संबंधों का विशद विवेचन किया है। उन्होंने विभिन्न मत-मतान्तरों के समन्वय पर बल दिया। वे हिन्दू जाति, हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने वाले प्रतिनिधि कवि हैं।

उनके राम चरित मानस के संबंध में अबुर्रहीम खानखाना का निम्नलिखित दोहा बड़ा प्रसिद्ध है :

 

राम चरित मानस विमल, संतन जीवन प्रान।

हिन्दुवन को वेद सम, जमनहिं प्रगट कुरान॥ 


तुलसीदास की मृत्यु और स्थान:-

राम चरित मानस की रचना के पश्चात् भक्त तुलसीदास आत्म साधना में लग गये। उन्होंने संवत् 1680 में काशी में परलोक गमन किया। इस संबंध में एक दोहा प्रसिद्ध है :-

 

संवत् सोरह सौ अस्सी, अस्सी गंग के तीर।

श्रावण शुक्ला सप्तमी, तुलसी तज्यो, शरीर॥ 

 

गोस्वामी तुलसीदास एक साथ कवि, भक्त, पण्डित, समाज सुधारक, लोक नायक, भविष्य द्रष्टा और स्रष्टा थे। उनकी रचनाओं में संसार का आधारभूत सिद्धांत मर्यादा, माधुर्य और समन्वय रहा है।


Friday, June 24, 2022

उसने कहा था

आलोचकों की दृष्टि में गुलेरी’ –
चंद्रधर शर्मा गुलेरी’ की अमर कहानियों की भूमिका में डॉ० अमरनाथ झा ने लिखा है – उसने कहा था’ शीर्षक कहानी में तो विशेषकर ऐसी विलक्षणता है की – ‘एतद्कृत कारणे किमन्यथा रोदति ग्रावा’.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इस कहानी की उच्छ्वसित प्रशंसा की है और मर्यादा में रहकर प्रेम की व्यंजन करने वाली अद्वितीय कहानी कहा है.

डॉ० नगेन्द्र ने लिखा है कि– ‘गुलेरी जी की कहानियों का प्रमुख आकर्षण तो रस ही है. यह रस उथली रसिकता या मानसिक विलासिता का तरल द्रव्य नहीं है. जीवन के गंभीर उपभोगों से खींचा हुआ गाढ़ा रस है.

आचार्य नन्द दुलारे वाजपेयी के अनुसार – यों उसने कहा था’ में घटनाएं भी हैंसंयोग भी है और रोमांटिक दृष्टि भी है. लेकिन उन सबका संघटन इस वैशिष्ट्यके साथ हुआ है और प्रेमकर्तव्य और आत्मबलिदान का पारस्परिक संघर्ष का इतना असाधारण और सम्वेदनात्मक रूप में हुआ है कि कहानी नयी हो जाती है.

डॉ० श्याम सुन्दर दास ने गुलेरी के साहित्य को अमूल्य रत्न माना है  क्योंकि गुलेरी ने अपनी कहानियों में पात्रों के भावपरिस्थिति में सजीवता का समावेश किया है.

मधुरेश ने लिखा है कि – उसने कहा था’ वस्तुतः हिंदी की पहली कहानी हैजो शिल्प विधान की दृष्टि से हिंदी कहानी को एक झटके में प्रौढ़ बना देती है.प्रेमबलिदानऔर कर्तव्य की भावना से अनेक कहानियाँ लिखी गयी है किन्तु यह कहानी अपनी मार्मिकता और सघन गठन के कारण आज भी अद्वितीय बनी हुयी है. हिंदी कहानी के प्रारंभ काल में ही ऐसी श्रेष्ठ रचना का प्रकाशित होना एक महत्वपूर्ण घटना है.
पं० विनोद शंकर व्यास ने मधुकरी की भूमिका में लिखा है कि- ‘1915 ई० में उसने कहा था’ कहानी ने विद्वानों को चकित कर दिया.... हिंदी कहानियो में आज तक इसके जोड़ की दूसरी कहानी नहीं निकली.... इस कहानी का शीर्षक ही बहुत आकर्षक है. हिंदी में यह पहली वास्तविक कहानी है. इस कहानी के सब अंग वर्तमान में है जो इस कहानी को पढ़ेगा वह जीवन भर इसे भूल नहीं पायेगा.

Thursday, June 23, 2022

प्रेमचन्द

1.प्रेमचन्द के अन्तिम उपन्यास और कहानी का नाम लिखिए

2- "आजकल धर्म तो धूर्तों का अड्डा बना हुआ है। इस निर्मल सागर में एक-से-एक मगरमच्छ पड़े हुए हैं। भोले-भाले भक्तों को निगल जाना उनका काम है।" उक्त कथन किसने किससे कहा है?

3-"कर चुके दूसरा उपाय! जरा सुनूं तो कौन-सा उपाय करोगे?.... मर-मर काम करो, उपज हो तो बाकी दे दो, चलो छुट्टी हुई।"उक्त कथन किसने किससे कहा?

4- दो बैलों की कथा में प्रेमचंद ने गधे के किन स्वभाव गत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ मूर्ख का प्रयोग ना कर किस अर्थ की ओर संकेत किया है?

5- हामिद के चरित्र की कोई दो विशेषताएँ बताइए।

6- "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है” उक्त कथन किसने किससे कहा है?


7- हामिद के पिता की मृत्यु किस कारण हुई थी? बुढी अमीना ने हामिद को उसके माता-पिता के बारे में क्या बताया था?

8-घास तो आपके अब्बा जान छीलते होंगे| यहां तो पीढ़ियोंसे शतरंज खेलते चले आ रहे हैं "| यह कथन किसका है और किस ओर संकेत करता है?

9-"तकदीर की खूबी है, मजूरी हम करे मज़ा दूसरे लूटें"उक्त कथन किस कहानी के किस पात्र का है?

10-विश्व प्रसिद्ध हिंदी व उर्दू के कथाकार मुंशी प्रेमचंद की तुलना किससे की गई है?



10×3=30

1- प्रेमचन्द के अनुसार साहित्य का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

2- कर्बला नाटक की मूल सम्वेदना पर प्रकाश डालिये?

3-सेवादन के स्त्री पत्रों पर चर्चा कीजिये।

4- शतरंज के खिलाड़ी कहानी के माध्यम से प्रेमचन्द किस और संकेत कर रहे हैं?

5- पूस की रात कहानी की मूल समस्या पर चर्चा कीजिये।

6- ईदगाह कहानी के माध्यम से प्रेमचन्द ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार पर व्यंग्य किया है। इस कथन की उदाहरण सहित पुष्टि कीजिये।

5×3=15
1- "दो बैलों की कथा" कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-कौन से नीति विषयक मूल्य उभर कर आए हैं ? 

2- हामिद ने चिमटे की उपयोगिता को सिद्ध करते हुए क्या-क्या तर्क दिये?

3-"दोनों खेत की दशा देख रहे थे। मुन्नी के मुख पर उदासी छाई थी, पर हल्कू प्रसन्न था।" मुन्नी की उदासी और हल्कू के प्रसन्नता का क्या कारण था?

4-पंचपरमेश्वर कहानी में निहित सन्देश पर प्रकाश डालिये।

5-सेवासदन उपन्यास में प्रेमचन्द ने समाज की किन समस्याओं को उजागर किया है?

Sunday, June 19, 2022

नशा

Thursday, June 16, 2022

पत्रकारिता प्रश्न पत्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न 10×2=20

1.पत्रकारिता का मूल तत्व क्या है?
2- प्रेमचन्द ने पत्रिकाओं में लेखन की शुरुआत कैसे की और उसका प्रकाशन कहाँ हुआ?
3-भारत में अखबारी पत्रकारिता की शुरुआत कब और किस पत्र से हुई ?
4-अज्ञेय द्वारा सम्पादित किन्ही दो पत्रिकाओं के नाम  लिखें
5- हिंदी प्रदेश से निकलने वाला पहला  पत्र कौन था और किसके संपादन में निकला था ?
6-भारत का पहला प्रेस कब और कहाँ कायम  हुआ था?
7-1921मे से “किसान” साप्ताहिक पत्र निकालना शुरू हुआ था इसके संपादक कौन थे। 
8-प्रभात खबर कोलकाता के सम्पादक कौन है?
9- सन्मार्ग के सम्पादक के नाम बताएं?
10-पत्रकारिता लोकतंत्र का कौनसा स्तंभ है? पत्रकारिता के कोई दो प्रकार लिखिए

आलोचनात्मक प्रश्न:-10×3=30

1. साहित्यिक पत्रकारिता में अनुवाद की भूमिका पर प्रकाश डालिए।

2- लघु पत्रकारिता पर विस्तार से चर्चा करें।

3- प्रेमचन्दयुगीन पत्रकारिता में राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश डालिये।

4-भारतेंदु युगीन पत्रकारिता पर प्रकाश डालिये।

टिप्पणी लिखें- 5×3=15

1- पीत पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं।

2- हिंदी प्रदीप पर टिप्पणी कीजिये

3- बालाबोधिनी पत्रिका पर चर्चा कीजिये